भगवद्गीता के 18 अध्याय

अठारह अध्याय

भगवद्गीता में 18 अध्याय हैं, और प्रत्येक अध्याय श्रीकृष्ण की शिक्षाओं के एक अलग पक्ष को खोलता है। ये सभी मिलकर बाह्य कर्म से आन्तरिक रूपान्तरण तक ज्ञान का एक सम्पूर्ण मानचित्र प्रस्तुत करते हैं।

उपलब्ध अध्याय

04

ज्ञान कर्म संन्यास योग

42 श्लोक

यह अध्याय कर्म के पीछे छिपे हुए गहरे आध्यात्मिक ज्ञान को प्रकट करता है। श्रीकृष्ण बताते हैं कि ज्ञान मन को शुद्ध करता है और जीवन को देखने की दृष्टि बदल देता है। इस अध्याय से हमें यह समझने को मिलता है कि ज्ञान और कर्म परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। गुरु से सीखने का महत्व, दिव्य अवतारों का उद्देश्य तथा ज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति इस अध्याय के प्रमुख विषय हैं। यह अध्याय भ्रम को दूर कर आत्मविश्वास, विवेक और आंतरिक शांति की ओर ले जाता है।

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05

कर्म संन्यास योग

29 श्लोक

क्या संसार में रहते हुए भी शांति प्राप्त की जा सकती है? इस अध्याय में श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं कि बाहरी त्याग से अधिक महत्वपूर्ण है भीतर की आसक्ति का त्याग। इस अध्याय से हमें यह सीखने को मिलता है कि सफलता और असफलता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें, परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना संतुष्ट कैसे रहें, और सभी प्राणियों के प्रति समभाव कैसे विकसित करें। यह अध्याय सिखाता है कि सच्ची स्वतंत्रता बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि भीतर की स्थिति से उत्पन्न होती है।

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06

ध्यान योग

47 श्लोक

मनुष्य का मन उसका सबसे बड़ा मित्र भी बन सकता है और सबसे बड़ा शत्रु भी। इस अध्याय में श्रीकृष्ण मन को संयमित करने, ध्यान का अभ्यास करने और आंतरिक स्थिरता प्राप्त करने की विधि बताते हैं। इस अध्याय से हमें यह सीखने को मिलता है कि अनुशासित जीवन, संतुलित दिनचर्या और निरंतर अभ्यास के माध्यम से मानसिक चंचलता को कैसे शांत किया जा सकता है। यह अध्याय आत्म-जागरूकता, एकाग्रता, करुणा और गहन आंतरिक शांति की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।

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शीघ्र आ रहा है

01

अर्जुन विषाद योग

47 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
02

सांख्य योग

72 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
03

कर्म योग

43 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
07

ज्ञान विज्ञान योग

30 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
08

अक्षर ब्रह्म योग

28 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
09

राजविद्या राजगुह्य योग

34 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
10

विभूति योग

42 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
11

विश्वरूप दर्शन योग

55 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
12

भक्ति योग

20 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
13

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

35 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
14

गुणत्रय विभाग योग

27 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
15

पुरुषोत्तम योग

20 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
16

दैवासुर सम्पद्विभाग योग

24 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
17

श्रद्धात्रय विभाग योग

28 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
18

मोक्ष संन्यास योग

78 श्लोक
शीघ्र आ रहा है

अपनी यात्रा शुरू करें

प्रत्येक अध्याय पिछले अध्याय पर आधारित है और आपको बाह्य कर्म से आन्तरिक ज्ञान की ओर ले जाता है। आप अध्याय 1 से प्रारम्भ कर सकते हैं या अपनी वर्तमान जिज्ञासा के अनुरूप किसी भी शिक्षापरक अध्याय को चुन सकते हैं।

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