भगवद्गीता 6.42 — या फिर योगियों के कुल में जन्म प्राप्त होता है
अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम्।
एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्॥ ६.४२॥
या फिर ऐसा योगभ्रष्ट साधक ज्ञानवान योगियों के परिवार में जन्म लेता है। इस प्रकार का जन्म संसार में अत्यन्त दुर्लभ माना गया है।
पदच्छेद
संस्कृत श्लोक को अध्ययन-सुविधा के लिए अलग-अलग शब्दों में विभाजित किया गया है।
शब्दार्थ
| पंक्ति 1 | |
|---|---|
| संस्कृत शब्द | अर्थ |
| अथवा | अथवा |
| योगिनाम् | योगियों के |
| एव | ही |
| कुले | कुल में |
| भवति | जन्म लेता है |
| धीमताम् | बुद्धिमानों के |
| पंक्ति 2 | |
|---|---|
| संस्कृत शब्द | अर्थ |
| एतत् | यह |
| हि | निश्चय ही |
| दुर्लभतरम् | अत्यन्त दुर्लभ |
| लोके | संसार में |
| जन्म | जन्म |
| यत् | जो |
| ईदृशम् | ऐसा |
| पंक्ति 1 | पंक्ति 2 | ||
|---|---|---|---|
| संस्कृत शब्द | अर्थ | संस्कृत शब्द | अर्थ |
| अथवा | अथवा | एतत् | यह |
| योगिनाम् | योगियों के | हि | निश्चय ही |
| एव | ही | दुर्लभतरम् | अत्यन्त दुर्लभ |
| कुले | कुल में | लोके | संसार में |
| भवति | जन्म लेता है | जन्म | जन्म |
| धीमताम् | बुद्धिमानों के | यत् | जो |
| ईदृशम् | ऐसा | ||
विस्तृत विवरण
परिचय
यहाँ भगवान श्रीकृष्ण योगभ्रष्ट साधक के लिए उपलब्ध एक अत्यंत दुर्लभ और श्रेष्ठ जन्म का वर्णन करते हैं।
भावार्थ
श्रीकृष्ण का गहरा आध्यात्मिक विश्लेषण
भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि कुछ योगभ्रष्ट साधकों को इससे भी अधिक अनुकूल अवसर प्राप्त होता है। यह अवसर अत्यंत दुर्लभ माना गया है।
योगिनामेव कुले: ऐसा साधक योगियों के परिवार में जन्म ले सकता है। ऐसे परिवार में आध्यात्मिक वातावरण, साधना, शास्त्रज्ञान और ईश्वरचिंतन स्वाभाविक रूप से उपलब्ध होते हैं।
धीमताम्: यहाँ केवल विद्वत्ता की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता की बात की गई है। ऐसे परिवारों में जीवन के उच्च उद्देश्यों की समझ बचपन से ही विकसित होने लगती है।
एतद्धि दुर्लभतरं लोके: भगवान श्रीकृष्ण विशेष रूप से कहते हैं कि ऐसा जन्म संसार में अत्यंत दुर्लभ है। इसका कारण यह है कि यह जन्म साधक को अपनी पूर्व साधना को आगे बढ़ाने के लिए असाधारण अवसर प्रदान करता है।
इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि आध्यात्मिक प्रयास केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है; वह भविष्य की परिस्थितियों और अवसरों को भी प्रभावित करता है।
योगी परिवार में जन्म लेने वाला साधक अपनी आध्यात्मिक यात्रा को अपेक्षाकृत सरलता और शीघ्रता से आगे बढ़ा सकता है।
हमारे जीवन के लिए संदेश (The Value of Spiritual Environment)
वातावरण का गहरा प्रभाव होता है: जिस वातावरण में हम रहते हैं, वह हमारे विचारों, आदतों और जीवन-दृष्टि को प्रभावित करता है।
व्यावहारिक तरीका: अपने जीवन में ऐसे लोगों, पुस्तकों और संगति को स्थान दें जो आपको उच्च मूल्यों और आत्मिक विकास की दिशा में प्रेरित करें।
आगे का विषय
भगवान श्रीकृष्ण ने योगी परिवार में जन्म लेने की दुर्लभता का वर्णन किया। अब वे बताते हैं कि ऐसे जन्म के बाद पूर्वजन्म की साधना किस प्रकार पुनः जागृत होती है।
इस श्लोक में छिपे संदेश
इस श्लोक को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखकर मनन करें और देखें कि कौन-सा गहरा संदेश आपके लिए खुलता है।
सूत्र
योगियों के परिवार में जन्म आध्यात्मिक प्रगति के लिए विशेष अवसर है।
श्रेष्ठ संस्कार साधना को सहज बना देते हैं।
पूर्व जन्म की साधना अनुकूल जन्म का कारण बन सकती है।
ज्ञानमय वातावरण व्यक्ति की चेतना को ऊँचा उठाता है।
आध्यात्मिक परिवार में जन्म सामान्य उपलब्धि नहीं है।
पूर्व प्रयास भविष्य में बेहतर अवसरों का निर्माण करते हैं।
सही वातावरण विकास की गति को कई गुना बढ़ा देता है।