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विविध यज्ञों का वेदों में विस्तार और कर्मजन्य स्वरूप
विभिन्न यज्ञ कर्म के माध्यम से साधक को शुद्ध करते हैं और उनके वास्तविक तत्त्व को समझने से कर्मबन्धन से मुक्ति प्राप्त होती है।
जीवन में उपयोग: किसी भी आध्यात्मिक अभ्यास को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य और आंतरिक अर्थ को समझकर करना चाहिए।