गुण और कर्म के अनुसार चातुर्वर्ण्य व्यवस्था
समाज में विभिन्न भूमिकाएँ व्यक्ति के गुणों और कर्मों के अनुसार निर्धारित होती हैं। भगवान इस व्यवस्था के रचयिता होते हुए भी उससे बंधे नहीं हैं।
जीवन में उपयोग: अपने स्वभाव, क्षमताओं और उत्तरदायित्वों को पहचानकर समाज में सार्थक योगदान देना चाहिए।