भगवद्गीता 10.30 — दैत्यों में प्रह्लाद, गणना करने वालों में काल, मृगों में सिंह, पक्षियों में गरुड़
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम् ।
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ॥ १०.३० ॥
🔊 इस श्लोक का अर्थ सुनें
Current voice: —
Ready
Text-to-speech is not supported by this browser.
मैं दैत्यों में प्रह्लाद हूँ, गणना (या ग्रास) करने वालों में काल हूँ, पशुओं में सिंह हूँ और पक्षियों में विनता-पुत्र गरुड़ हूँ।
पदच्छेद
संस्कृत श्लोक को अध्ययन-सुविधा के लिए अलग-अलग शब्दों में विभाजित किया गया है।
शब्दार्थ
| पंक्ति 1 | |
|---|---|
| संस्कृत शब्द | अर्थ |
| प्रह्लादः | प्रह्लाद |
| च | और |
| अस्मि | हूँ |
| दैत्यानाम् | दैत्यों में |
| कालः | काल, समय |
| कलयताम् | गणना या ग्रास करने वालों में |
| अहम् | मैं |
| पंक्ति 2 | |
|---|---|
| संस्कृत शब्द | अर्थ |
| मृगाणाम् | पशुओं में |
| च | और |
| मृगेन्द्रः | सिंह |
| अहम् | मैं |
| वैनतेयः | गरुड़ |
| च | और |
| पक्षिणाम् | पक्षियों में |
| पंक्ति 1 | पंक्ति 2 | ||
|---|---|---|---|
| संस्कृत शब्द | अर्थ | संस्कृत शब्द | अर्थ |
| प्रह्लादः | प्रह्लाद | मृगाणाम् | पशुओं में |
| च | और | च | और |
| अस्मि | हूँ | मृगेन्द्रः | सिंह |
| दैत्यानाम् | दैत्यों में | अहम् | मैं |
| कालः | काल, समय | वैनतेयः | गरुड़ |
| कलयताम् | गणना या ग्रास करने वालों में | च | और |
| अहम् | मैं | पक्षिणाम् | पक्षियों में |
विस्तृत विवरण
परिचय
नियंत्रण और मर्यादा की विभूतियों के बाद भगवान अब उन उदाहरणों की ओर बढ़ते हैं जो असाधारण भक्ति, समय की शक्ति और पशु-पक्षियों में श्रेष्ठता को दर्शाते हैं.
भावार्थ
भक्ति, काल और पराक्रम में विभूति
इस श्लोक में एक विशेष बात यह है कि भगवान दैत्य कुल में उत्पन्न भक्त प्रह्लाद को अपनी विभूति बताते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि श्रेष्ठता जन्म या कुल से नहीं, भाव और भक्ति से पहचानी जाती है.
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानाम् — दैत्यों में प्रह्लाद: प्रह्लाद का जन्म ऐसे परिवार में हुआ जो भगवान का विरोधी था, फिर भी वे अटल भक्ति पर स्थिर रहे. उनकी दृढ़ता यह सिखाती है कि प्रतिकूल वातावरण में भी हृदय की निष्ठा बनी रह सकती है.
कालः कलयताम् — गणना करने वालों में काल: समय सबको गिनता और सबका लेखा रखता है. उसकी गति को कोई रोक नहीं सकता. भगवान स्वयं को समय कहकर यह बताते हैं कि जो कुछ बनता, बदलता और मिटता है, उसके पीछे उनकी शक्ति है. यह बात आगे अध्याय ग्यारह के काल-स्वरूप दर्शन की ओर भी संकेत करती है.
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहम् — पशुओं में सिंह: सिंह साहस, गरिमा और निर्भयता का प्रतीक है.
वैनतेयश्च पक्षिणाम् — पक्षियों में गरुड़: विनता के पुत्र गरुड़ पक्षियों के राजा और भगवान विष्णु के वाहन हैं. वे गति, शक्ति और सेवा-भाव के प्रतीक हैं.
हमारे जीवन के लिए संदेश
परिस्थिति से ऊपर उठना: प्रह्लाद का उदाहरण बताता है कि वातावरण कैसा भी हो, सही मार्ग पर टिके रहना संभव है.
समय का सम्मान: समय सबसे बड़ा शिक्षक और सबसे बड़ी संपदा है. उसका सदुपयोग हमारे जीवन की दिशा तय करता है.
सेवा के साथ शक्ति: गरुड़ की शक्ति सेवा से जुड़ी है. जब सामर्थ्य सेवा-भाव के साथ हो, तब वह श्रेष्ठ बनती है.
भक्ति, काल और पराक्रम में विभूति
इस श्लोक में एक विशेष बात यह है कि भगवान दैत्य कुल में उत्पन्न भक्त प्रह्लाद को अपनी विभूति बताते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि श्रेष्ठता जन्म या कुल से नहीं, भाव और भक्ति से पहचानी जाती है.
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानाम् — दैत्यों में प्रह्लाद: प्रह्लाद का जन्म ऐसे परिवार में हुआ जो भगवान का विरोधी था, फिर भी वे अटल भक्ति पर स्थिर रहे. उनकी दृढ़ता यह सिखाती है कि प्रतिकूल वातावरण में भी हृदय की निष्ठा बनी रह सकती है.
कालः कलयताम् — गणना करने वालों में काल: समय सबको गिनता और सबका लेखा रखता है. उसकी गति को कोई रोक नहीं सकता. भगवान स्वयं को समय कहकर यह बताते हैं कि जो कुछ बनता, बदलता और मिटता है, उसके पीछे उनकी शक्ति है. यह बात आगे अध्याय ग्यारह के काल-स्वरूप दर्शन की ओर भी संकेत करती है.
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहम् — पशुओं में सिंह: सिंह साहस, गरिमा और निर्भयता का प्रतीक है.
वैनतेयश्च पक्षिणाम् — पक्षियों में गरुड़: विनता के पुत्र गरुड़ पक्षियों के राजा और भगवान विष्णु के वाहन हैं. वे गति, शक्ति और सेवा-भाव के प्रतीक हैं.
हमारे जीवन के लिए संदेश
परिस्थिति से ऊपर उठना: प्रह्लाद का उदाहरण बताता है कि वातावरण कैसा भी हो, सही मार्ग पर टिके रहना संभव है.
समय का सम्मान: समय सबसे बड़ा शिक्षक और सबसे बड़ी संपदा है. उसका सदुपयोग हमारे जीवन की दिशा तय करता है.
सेवा के साथ शक्ति: गरुड़ की शक्ति सेवा से जुड़ी है. जब सामर्थ्य सेवा-भाव के साथ हो, तब वह श्रेष्ठ बनती है.
आगे का विषय
भगवान ने भक्ति, काल और पराक्रम में अपनी विभूतियाँ बताईं. अब वे पवित्र करने वाली वायु, आदर्श वीर श्रीराम, जल के जीवों और पवित्र नदी गंगा में अपनी उपस्थिति बताते हैं.
इस श्लोक में छिपे संदेश
इस श्लोक को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखकर मनन करें और देखें कि कौन-सा गहरा संदेश आपके लिए खुलता है।
सूत्र
जन्म का वातावरण नहीं, भक्ति और चरित्र मनुष्य को महान बनाते हैं।
समय सबको गिनता और खींच ले जाता है; उसका सम्मान करना सीखें।
साहस और गरिमा जब मिलते हैं, तब नेतृत्व बनता है।
ऊँची उड़ान के लिए पंखों के साथ निष्ठा भी चाहिए।
हर श्रेणी का शिखर ईश्वर की झलक देता है।
सच्ची भक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अटल रहती है।
जो समय को पहचानता है, वह जीवन को सार्थक बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'प्रह्लाद' को दैत्यों में क्यों बताया गया?
'कलयताम्' में 'काल' का क्या अर्थ है?
'मृगेन्द्र' कौन है?
'वैनतेय' कौन हैं?
इस श्लोक का एक वाक्य में व्यावहारिक संदेश क्या है?
संबंधित विषय खोजें
इस श्लोक से जुड़े विषयों पर और श्लोक: