भगवान के लिए कर्म करने वाला, अनासक्त और वैररहित भक्त ही उन्हें प्राप्त करता है
ईश्वर को पाने वाला भक्त वही है जो भगवान के लिए कर्म करता है, उन्हें परम लक्ष्य मानता है, आसक्ति छोड़ देता है और किसी प्राणी से वैर नहीं रखता।
जीवन में उपयोग: अपने कार्य को सेवा-भाव से करें, परिणाम की आसक्ति छोड़ें और सबके प्रति द्वेषरहित, मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखें।