जो भी करो, उसे भगवान् को अर्पित करो
जीवन का प्रत्येक कर्म, चाहे भोजन, यज्ञ, दान या तप हो, भगवान् को अर्पण के भाव से किया जाए तो वह साधारण कर्म भी योग और भक्ति बन जाता है।
जीवन में उपयोग: अपने रोज़ के काम, पढ़ाई, सेवा, भोजन और दान को अर्पण-भाव से करें; इससे कर्म में निष्ठा बढ़ती है और अहंकार तथा फल की चिंता घटती है।