पत्र, पुष्प, फल और जल भी भक्ति से अर्पित हों तो भगवान् स्वीकार करते हैं
भगवान् वस्तु की मात्रा या मूल्य नहीं, अर्पण करने वाले की भक्ति और शुद्ध भाव को देखते हैं; भक्तिपूर्वक अर्पित साधारण वस्तु भी वे स्वीकार करते हैं।
जीवन में उपयोग: भक्ति और सेवा के लिए बड़े साधनों की प्रतीक्षा न करें; जो सहज उपलब्ध हो, उसे प्रेम, श्रद्धा और शुद्ध भाव के साथ अर्पित करें।