जैसे पुराने वस्त्र त्यागकर नए धारण किए जाते हैं
मृत्यु आत्मा का अन्त नहीं, केवल पुराने शरीर का त्याग और नए शरीर की प्राप्ति है, जैसे वस्त्र बदलना।
जीवन में उपयोग: मृत्यु और वियोग को अन्तिम हानि मानने के बजाय परिवर्तन की स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में समझें और शोक को संतुलित करें।