पापरहित ऋषि ब्रह्मनिर्वाण प्राप्त करते हैं
जिस साधक के पाप, संशय और मानसिक विकार समाप्त हो चुके हैं तथा जो समस्त प्राणियों के कल्याण में लगा रहता है, वह परम शान्ति को प्राप्त करता है।
जीवन में उपयोग: अपने व्यक्तिगत लाभ से आगे बढ़कर समाज और दूसरों के कल्याण के लिए भी कार्य करने का प्रयास करें।