अनन्य भक्तों के योगक्षेम का भगवान् स्वयं वहन करते हैं
जो भक्त अन्य आश्रयों को छोड़कर अनन्य भाव से भगवान् का चिंतन और उपासना करते हैं, उन नित्य-युक्त भक्तों की आवश्यक प्राप्ति और प्राप्त वस्तु की रक्षा का दायित्व भगवान् स्वयं वहन करते हैं।
जीवन में उपयोग: अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से करते हुए परिणाम और सुरक्षा की अत्यधिक चिंता भगवान् पर छोड़ें, और मन को निरंतर उनके स्मरण में स्थिर रखें।