काम और क्रोध ही रजोगुण से उत्पन्न महाशत्रु हैं
मनुष्य को पाप की ओर धकेलने वाली शक्ति कामना है, जो पूरी न होने पर क्रोध बन जाती है; यही आत्म-उन्नति का सबसे बड़ा शत्रु है।
जीवन में उपयोग: अपनी इच्छाओं और उनके अवरोध से उठने वाले क्रोध को पहचानें और उनके वश में होकर निर्णय करने से बचें।