सब धर्मों का आश्रय छोड़कर केवल भगवान् की शरण में आओ, वे सब पापों से मुक्त करेंगे
सभी साधनों और धर्म-कर्मों के कर्तापन तथा आश्रय के अभिमान को छोड़कर पूर्ण समर्पण के साथ केवल भगवान् की शरण लो। वे अपनी कृपा से सब पापों से मुक्त करने का वचन देते हैं, इसलिए शोक और भय का कोई कारण नहीं। यह कर्तव्य के त्याग का उपदेश नहीं, बल्कि कर्तव्य करते हुए भी भगवान् पर पूर्ण निर्भरता का सार है।
जीवन में उपयोग: अपने प्रयास, साधना और कर्तव्य निभाते हुए भी अपने बल और पुण्य के अभिमान से मुक्त होकर ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखें, और अपराधबोध या भय के बोझ को उनकी कृपा पर छोड़ दें।