वह विवेकी परिवार बनो जिसे पाकर कोई और भाग्यशाली हो।
परिवार पर भगवद्गीता के उद्धरण
81 उद्धरण – पढ़ें, मनन करें और साझा करें
भगवद्गीता से लिए गए उद्धरण 81 उद्धरण, हर एक अपने श्लोक से जुड़ा।
परिवार पर भगवद्गीता के उद्धरण पढ़ें, जो रणभूमि में अपनों को लेकर अर्जुन की उलझन और कर्तव्य, प्रेम व मोह पर श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन को दर्शाते हैं।
सभी 81 उद्धरण
सब प्राणी एक ही माता-पिता की संतान हैं।
तुम जिस प्राणी से भी मिलते हो, वह महान परिवार का भाई-बहन है।
संसार अनेक प्रकार का एक परिवार है।
विवेकपूर्ण परवरिश जीवन के दुर्लभतम उपहारों में से है।
ऐसा घर बनाओ जहाँ साधक पनपें।
हर वंशवृक्ष एक साझी जड़ से उगता है।
सब शिक्षक, सब विद्यार्थी, सब प्राणी: एक आलिंगन के भीतर एक परिवार।
ब्रह्मांड का एक पारिवारिक हृदय है।
पूरा संसार एक वंशवृक्ष है; जड़ से प्रेम करो।
सब पैरों, हाथों और आँखों को एक परिवार का समझो।
सबके पिता और माता: प्रकृति और आत्मा।
संसार के प्रपितामह: जीवन की लंबी परंपरा का आदर करो।
परिवार के मूल्य उसकी मौन विरासत हैं।
सबसे बड़े और सबसे छोटे, दोनों की अपनी भूमिका है।
परिवार से संघर्ष स्वयं के भीतर का संघर्ष है।
घर आचरण की पाठशाला हैं।
हर भाई-बहन परिवार में एक अलग स्वर लाता है।
परिवार शिक्षाओं का जीवित पुस्तकालय है।
स्मरण के अनुष्ठान परिवार का सूत्र जीवित रखते हैं।
परिवार एक नदी है; उसके स्रोत का सम्मान कीजिए।
भाई-बहन वह पहली टीम हैं जिसके हम सदस्य होते हैं।
पक्ष चुनने से पहले पूरे वंश-वृक्ष को देखिए।
पिता, पुत्र, चाचा, गुरु: हर भूमिका प्रेम का एक द्वार है।
टूटा परिवार वहाँ रिक्ति छोड़ जाता है जहाँ मार्गदर्शन हुआ करता था।
निरंतरता वह उपहार है जो हम अगली पीढ़ी के ऋणी हैं।
हर परिवार चुनावों की एक वंश-परंपरा लेकर चलता है।
परिवार की शक्ति उसके शांत संकल्पों का योग है।
परिवार में कोई स्वर इतना छोटा नहीं कि गिना न जाए।
परिवार उद्देश्यों को साथ उठाते हैं।
समधी, मित्र, परिवार: हमारे दायरे जितना हम मानते हैं उससे अधिक एक-दूसरे में मिलते हैं।
आज तुम किस पूर्वज का विवेक अपने साथ लिए चल रहे हो?
अपने परिवार से प्रेम करो, उनके स्वामी बने बिना।
सब जीवन को स्वजन की तरह देखो।
उन लोगों को याद रखो जिन्हें तुम समय से नहीं बचा सकते; अभी उनसे प्रेम करो।
जो तुम्हें प्रिय है उसे अभी सँजोओ; समय प्रतीक्षा नहीं करेगा।
तुम्हारा घर और तुम्हारे लोग उपहार हैं, संपत्ति नहीं।
साझे स्रोत को याद रखो और सबके साथ स्वजन जैसा व्यवहार करो।
पावन हर प्राणी का माता-पिता और रक्षक है।
शुद्ध हृदय कठिन परिवारों और कठिन समय में भी पनप सकता है।
क्षमा वैसे माँगो जैसे बच्चा माता-पिता से माँगता है।
प्रेम वैसे क्षमा करता है जैसे माता-पिता, मित्र और प्रिय क्षमा करते हैं।
अपने प्रियजनों के लिए पूरी तरह उपस्थित रहो, उन्हें जकड़े बिना।
पृथ्वी का आदर सब प्राणियों की माता के रूप में करो।
धन और कुल का नाम उपहार हैं, श्रेणियाँ नहीं।
संघर्ष वहाँ सबसे कठिन होता है जहाँ प्रेम पहले से बसता है।
प्रेम से दिया हुआ विवेक सबसे अच्छी विरासत है।
जो तुम माता-पिता में खोजते हो, वह पावन में पा सकते हो।
पावन में माँ की कोमलता और पिता की दृढ़ता, दोनों पाओ।
उन पूर्वजों का आदर करो जिन्होंने उसे बनाया जिस पर तुम खड़े हो।
उन्हें याद करो जो तुमसे पहले आए और तुम्हें आगे ले गए।
अपने और दूसरों के प्रति देखभाल के कर्म के रूप में पकाओ और खाओ।
जो तुम आगे देते हो, वह किसी का दुर्लभ सौभाग्य बन सकता है।
विवेकी सलाहकार किसी भी घर या राष्ट्र का खज़ाना है।
अपने शिक्षकों का आदर करना संसार के माता-पिता का सम्मान है।
बड़ों की स्थिर आवाज़ पूरे कक्ष को उठा सकती है।
अपने ही लोगों को हानि पहुँचाकर बनी प्रसन्नता टिकती नहीं।
शिक्षक और बुज़ुर्ग खज़ाना हैं; जब तक हैं, उनका आदर करो।
दिव्य, ऋषियों और सर्पों को एक ही घर के सदस्य देखो।
पूर्वजों का स्मरण कृतज्ञता का एक रूप है।
अपनों से गहरा प्रेम करो और अनजानों के लिए भी जगह रखो।
साहस पीढ़ियों में बहता है।
हमारे पक्ष भिन्न हों तब भी हमारे संबंध लुप्त नहीं होते।
उन पीढ़ियों का सम्मान कीजिए जिन्होंने आपको बनाया।
बड़ों के प्रति कृतज्ञता प्रेम का आजीवन ऋण है।
जो आप आगे देना चाहते हैं, उसे जीकर सिखाइए।
जीवन को अच्छी तरह जीकर दिवंगतों का सम्मान कीजिए।
स्वयं के साथ दूसरों के लिए भी पकाइए।
विरासत ट्रॉफ़ी से अधिक एक ज़िम्मेदारी है।
बड़े की शांति छोटों को स्थिर करती है।
हमारी आशाएँ हमारे प्रियजनों के साथ बुनी होती हैं।
हमारे निर्णयों में संबंध कोई पाद-टिप्पणी नहीं हैं।
बाँटी हुई मेज़ आशीर्वादित मेज़ है।
आपकी आदतें आपके परिवार की आदतें बन जाती हैं।
जब चाह तीव्र हो जाए, तब मित्रों और परिवार के प्रति विशेष सावधान रहिए।
जिन्होंने आपको खड़े होने की भूमि दी, उन्हें कृतज्ञता अर्पित कीजिए।
विरासत में मिले मूल्य, दोबारा गढ़े गए मूल्यों से हल्के होते हैं।
जान-बूझकर सूत्र तोड़ेंगे तो खुला सिरा आपको महसूस होगा।
यदि तुम अन्य प्राणियों को स्वजन देखते तो उनके साथ कैसा व्यवहार करते?
कौन-से भोजन तुम्हें सांत्वना और जुड़ाव देते हैं?
तुम अपने परिवार या जीवन के किस चक्र को समाप्त करने को तैयार हो?
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