कछुए की तरह इन्द्रियों को समेट लेना
जैसे कछुआ आवश्यकता पड़ने पर अपने अंग समेट लेता है, वैसे ही साधक को इन्द्रियों को विषयों से हटाने की सामर्थ्य प्राप्त करनी चाहिए।
जीवन में उपयोग: मोबाइल, भोजन और मनोरंजन जैसे आकर्षणों से जब आवश्यक हो, तब ध्यान को समेट लेने का अभ्यास करें।