जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण और धनुर्धर अर्जुन हैं, वहीं श्री, विजय, विभूति और नीति है
संजय का निष्कर्ष है कि जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण का दिव्य मार्गदर्शन और अर्जुन का पुरुषार्थ, दोनों मिलते हैं, वहीं श्री, विजय, ऐश्वर्य और स्थिर नीति निवास करते हैं। ईश्वर-कृपा और मानवीय प्रयास का यह समन्वय गीता का समापन-संदेश है।
जीवन में उपयोग: सफलता के लिए पूर्ण प्रयास और ईश्वर पर श्रद्धा, दोनों को साथ रखें: कर्म में पुरुषार्थ और मार्गदर्शन में समर्पण।