अच्छाई की ओर किया गया कोई प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।
प्रयास पर भगवद्गीता के उद्धरण
392 उद्धरण – पढ़ें, मनन करें और साझा करें
भगवद्गीता से लिए गए उद्धरण 392 उद्धरण, हर एक अपने श्लोक से जुड़ा।
प्रयास पर भगवद्गीता के उद्धरण खोजें और जानें कि गीता ईमानदार, अनुशासित परिश्रम को कैसे प्रोत्साहित करती है और अंतिम परिणाम को ऊपर वाले पर छोड़ना सिखाती है।
सभी 392 उद्धरण
प्रयास तुम्हारे हाथ में है; परिणाम में अनेक हाथ होते हैं।
बेचैन फल का पीछा करते हैं; स्थिर बीज बोते हैं।
काम दृढ़ता से करो; परिणाम ढीले हाथ से थामो।
हर सच्चा कदम ऐसा निशान छोड़ता है जो मिटता नहीं।
केवल कठिन नहीं, समझदारी से प्रयास करो।
अपना प्रयास फिर शुरू करो; तुम्हारा अतीत तुम्हारे पक्ष में है।
पूर्णता अनेक छोटे, ईमानदार प्रयासों का काम है।
अनेक छोटे कदम पर्याप्त हैं।
इस मार्ग पर किया गया कोई भी सच्चा प्रयास व्यर्थ नहीं जाता।
बिना पकड़ के स्थिर प्रयास स्थायी शांति लाता है।
टिकाऊ प्रयास वीरतापूर्ण उफान से बेहतर है।
संघर्ष प्रयास के पदचिह्न हैं।
भलाई की ओर प्रयास हर असफलता से अधिक टिकता है।
रुककर पूछो: क्या यह प्रयास किसी वास्तविक चीज़ की सेवा करता है?
ईमानदारी से किया प्रयास पावन का एक रूप है।
तुम अपना सर्वश्रेष्ठ कर सकते हो और फिर भी उससे थोड़ा अलग खड़े रह सकते हो।
अपने प्रयास को अपना ही पुरस्कार बनने दो।
अपना सर्वश्रेष्ठ दो, फिर पकड़ ढीली करो।
अपना हिस्सा अच्छी तरह कीजिए और जो आपका नहीं है, उससे शांति बना लीजिए।
प्रयास परिणाम लाता है; विवेक ही विश्राम देता है।
प्रयास सीढ़ी है; शांति छत।
इच्छा जितनी ही पद्धति भी मायने रखती है।
स्थिर, सही दिशा का प्रयास जंगली उत्साह से आगे पहुँचता है।
निपुणता एक शांत संचय है।
शून्य में उँडेला गया प्रयास तुम्हें खाली छोड़ता है।
प्रयास और नमन एक ही हृदय में रह सकते हैं।
प्रयास सफलता का एकमात्र ईमानदार मार्ग है।
शरीर और मन का हर प्रयास तुम्हें निखार सकता है।
प्रयास के प्रति समर्पित रहो और निर्णय के प्रति उदासीन।
तुम्हारा पिछला प्रयास अगले चरण की अच्छी शुरुआत तैयार करता है।
संसार साधारण परिश्रम से जुड़ा हुआ है।
आसक्त लोगों जितनी ऊर्जा से काम कीजिए, पर आसक्ति के बिना।
परिणाम से कम अपेक्षा रखो; कार्य को अधिक दो।
आरंभ करने वाले को प्रयास चाहिए; आगे बढ़े हुए को शांति।
सफलता उन्हें मिलती है जो सही साधनों से प्रयास करते हैं।
पिछले प्रयास के बीज अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होते हैं।
प्रयास करना ही पहले से असामान्य है।
समर्पित प्रयास को तालियों की आवश्यकता नहीं होती।
केवल प्रयास पर्याप्त नहीं; उसके साथ एक शुद्ध हृदय भी चलना चाहिए।
मार्गों की तुलना चलने का समय खा जाती है।
हर अनुष्ठान एक प्रयास है; हर प्रयास एक अनुष्ठान बन सकता है।
कठिनाई पर निराश मत हो; पूछो कि तुम्हारी पद्धति सही है या नहीं।
जो आवश्यक है उसमें अपना श्रेष्ठ दीजिए, और हल्के होकर चल दीजिए।
भाग्य और प्रयास प्रतिद्वंद्वी नहीं; साझेदार हैं।
अपने काम को सुधारिए; अपना पथ मत छोड़िए।
अनेक हाथ, अनेक शंख: साझा प्रयास साझा ध्वनि बनाता है।
जीत हो या हार, पूरे मन से किया गया प्रयास तुम्हें अखंड रखता है।
छोटा आरंभ करो; यहाँ कुछ भी खोता नहीं।
स्थिरता की ओर हर छोटा क़दम सदा के लिए संचित रहता है।
अपना श्रेष्ठ दीजिए, और फिर उसे अर्पित कर दीजिए।
अपना प्रयास अर्पित कर दो, तुम्हारी स्वतंत्रता बनी रहेगी।
आसक्ति-रहित प्रयास आत्म-शुद्धि है।
सड़क मुड़े तब भी अच्छी शुरुआत का फल मिलता है।
अपने प्रयास को स्वच्छ और उज्ज्वल जलने दो।
छलांग न लगे तो सीढ़ी चढ़िए।
प्रयास अनेक रूपों में आता है; सबका सम्मान कीजिए।
भारी प्रयास अच्छा प्रयास नहीं होता।
आसक्ति के बिना प्रयास हल्का और सशक्त हो जाता है।
लालसा-रहित स्थिर प्रयास अधिक टिकता है।
पूर्णता छोटे कर्तव्यों से बनती है जो पूरे मन से किए गए हों।
अपने स्वभाव के साथ काम कीजिए, उसके विरुद्ध नहीं; प्रयास हल्का हो जाएगा।
प्रयास दो; शांति बचाए रखो।
परिश्रमी रहिए; कोई देख रहा है।
महत्वाकांक्षी जितने परिश्रमी बनिए, ऋषि जितने स्वतंत्र।
आपका अपना काम, अनाड़ी होने पर भी, आपका अपना है।
प्रयास के बदले पुरस्कार के सौदे से स्वयं को मुक्त करो।
अंक-पट्ट छोड़िए; खेलते रहिए।
आपका प्रयास एक बड़े ताने-बाने का एक धागा है।
साधन मायने रखते हैं, पर उन्हें थामने वाला हाथ अधिक मायने रखता है।
काम से अधिक पुरस्कार को चाहने पर काम को कष्ट होता है।
अभ्यास प्रयास को आनंद में बदल देता है।
आरंभिक प्रयास स्थायी शांति की कीमत है।
ऊर्जा और कौशल तब सबसे अधिक मायने रखते हैं जब वे किसी बड़े उद्देश्य की सेवा करें।
कृपा प्रयास के साथ काम करती है, उसकी जगह नहीं।
जब कृपा और प्रयास मिलते हैं, बाधाएँ छोटी हो जाती हैं।
अधूरा आरंभ भी गिना जाता है।
जिस साधना में हर प्रयास गिना जाता है, उसमें तुम असफल नहीं हो सकते।
अपने जीवन को ईमानदार प्रयास से बनाए रखिए।
सारा ईमानदार प्रयास किसी गहरी नींव पर टिका है।
अथक प्रयास भाषणों से अधिक प्रेरित करता है।
जो कुछ है उससे पूरा प्रयास करो, और जो आए उसका स्वागत करो।
आज काम करो ताकि कल विश्राम के योग्य बनो।
व्यस्तता को खोज मत समझ लीजिए।
शांत प्रयास को दर्शक नहीं चाहिए।
उत्साह को काम से आने दीजिए, उसके पुरस्कार से नहीं।
कौशल, प्रयास और संकल्प मिलकर विश्वसनीय व्यक्ति बनाते हैं।
अच्छा होना चाहना और अच्छा हो पाना एक नहीं हैं।
अहं से प्रेरित उपक्रम थकाते हैं; अर्पित प्रयास नई शक्ति देता है।
भ्रम में अधूरा छोड़ा गया कार्य स्वयं को अधूरा छोड़ना है।
प्रयास प्रेम की अभिव्यक्ति हो सकता है, असुरक्षा की नहीं।
कर्म में कौशल दिखाइए; भाव पीछे आएगा।
दोष खोजना आसान है; अभ्यास कठिन और अधिक फलदायी है।
तुम्हारे जीवन में यह प्रयास का मौसम है या ठहराव का?
क्या तुम्हें याद है कि तुम्हारे प्रयास वास्तव में किसके लिए हैं?
तुम्हारे पिछले प्रयास ने कौन-सी शुरुआतें पहले ही तैयार कर दी हैं?
तुम्हारी कौन-सी पद्धति को सुधार की ज़रूरत है?
स्वयं को उठाओ; स्वयं को गिरने मत दो।
शून्य से नहीं, वहीं से फिर शुरू करो जहाँ छोड़ा था।
उठो; काम प्रतीक्षा कर रहा है।
यदि तुम विवेक में जन्मे नहीं, तब भी उसे बना सकते हो।
समझने की चाह ही प्रगति है।
तुम जो खोजते हो, वही तय करता है कि तुम कहाँ पहुँचते हो।
पूर्णता नहीं, कुशलता का अभ्यास करो।
सफलता जल्दी आती है; शांति गहरी साधना माँगती है।
अपनी बिखरी ऊर्जा को एक स्थिर लौ में समेट लो।
चीज़ें पीछे छोड़ना आसान है; आसक्ति छोड़ना असली काम है।
कर्म से चढ़ो; ठहराव से पहुँचो।
शांति बगीचे की तरह उगाई जाती है।
कठिन का अर्थ असंभव नहीं।
श्रद्धा से माँगो, प्रयास से काम करो, विनम्रता से पाओ।
छोटे से शुरू करो: एक अक्षर, एक कदम, एक साँस।
अपना हिस्सा पूरा कीजिए; फसल खेत पर छोड़ दीजिए।
पूरे मन से काम करो और परिणाम को छोड़ दो।
काम करो, चाह को जाने दो।
वैसे कर्म करो जैसे ज्ञानियों ने किए: पूरे मन से, पर बिना आसक्ति।
हर सच्ची भक्ति के हाथ-पैर होते हैं।
हर कार्य को कुछ सिखाने दो।
आरंभ करने जितना विश्वास रखो; देखने जितना अभ्यास करो।
आरंभ में कर्म; अंत में विश्राम।
दृढ़ संकल्प और आशावान हृदय के साथ अभ्यास करो।
दुःख से दूर हर छोटा कदम मायने रखता है।
आदत वह नदी है जो थकने पर तुम्हें बहा ले जाती है।
धैर्यपूर्ण, स्थिर प्रयास सर्वोच्च लक्ष्य तक पहुँचता है।
बिना हड़बड़ी के डटे रहो, लक्ष्य निकट आता है।
पूरा जानने के लिए पूरा ध्यान दो।
स्थिर स्मरण प्रयास को सहजता में बदल देता है।
प्रयास करने जितना भरोसा रखो, फिर अनुभव को बोलने दो।
जीवन छोटा और अधूरा है; गहरा काम अभी शुरू करो।
विवेक की भूख एक अच्छी भूख है।
समय महान गणक है; अपने घंटों को सार्थक बनाओ।
स्वयं को धोखा मत दो; शॉर्टकट पथ से अधिक महँगा पड़ता है।
जो तुम पहले से हो, उसका श्रेष्ठ रूप बनो।
टालना बंद करो; काम प्रतीक्षा कर रहा है।
काम कठिन हो तब भी उसमें बने रहो।
कृपा वह दिखाती है जहाँ अकेला प्रयास नहीं पहुँच सकता।
कोई भी अनुष्ठान दर्शन को बलपूर्वक नहीं ला सकता।
पावन में प्रवेश प्रेम से होता है, अकेले प्रयास से नहीं।
वहीं से आरंभ कीजिए जहाँ आप हैं, वहाँ से नहीं जहाँ होने की इच्छा है।
जो कार्य सामने है, उसे ऐसे कीजिए मानो वह ईश्वर के लिए हो।
शांति चढ़ाई के अंत में नहीं, छोड़ने के क्षण में मिलती है।
ध्यान के एक छोटे कर्म से शुरू करो।
अपने लिए एक छोटा, परवाह वाला काम करो, फिर दूसरा।
श्रद्धा प्रयास को भक्ति में बदल देती है।
तुम कैसे खोजते हो, वही तय करता है कि क्या पाते हो।
ठहराव स्थिर काम का पुरस्कार है, उसका विकल्प नहीं।
एकाग्र ध्यान एक शांत शक्ति है।
कोमल निरंतरता ज़ोर वाले प्रयास से अधिक टिकती है।
जितना लौटते हो, उतना कम प्रयास लगता है।
जितना सोचते हो उससे बेहतर जगह से फिर शुरू करो।
अच्छी तरह बनी आदतों को भारी काम करने दो।
भीड़ से स्वयं को मत मापो; अपनी सच्चाई से मापो।
तुम्हारे भीतर का बीज तुम्हारे ध्यान की प्रतीक्षा कर रहा है।
छोटी बातों में निरंतर रहो, बड़ी बातें सहज आती हैं।
केवल पुरस्कारों पर बना जीवन उन्हें कमाता ही रहता है।
कृपा वे आँखें खोलती है जो अकेला प्रयास नहीं खोल सकता।
जिस ऊर्जा पर तुम निर्भर हो, वह तुमसे परे के स्रोत से आती है।
महिमा अपना भाग अच्छी तरह निभाने में है।
भरोसा रखो कि तुम्हारा स्थिर प्रयास गिना जाता है।
सागर तैरने की ज़िद से नहीं, नाव मिल जाने से पार होता है।
जब प्रयास भारी लगे, शरण लीजिए और फल पर अपनी पकड़ ढीली कर दीजिए।
कुशलता वही है जब शांत ध्यान सामने के कार्य में लग जाए।
आत्मा की खोज में निरंतरता अपना ही पुरस्कार है।
शिक्षक बीज देते हैं; विद्यार्थी उन्हें उगाते हैं।
जो प्रयत्न करते रहते हैं, वे आत्मा को अपने भीतर पाते हैं।
भलाई में ऊर्जावान रहो और द्वेष से मुक्त।
अपनी ऊर्जा को भलाई की सेवा करने दो, द्वेष की नहीं।
अपने देने और प्रयास को कृतज्ञता से आरंभ करो।
सर्वोत्तम चीज़ें अक्सर पहले कड़वी लगती हैं।
हर उपक्रम में दोष होते हैं, जैसे हर अग्नि में धुआँ।
पहले उठो; बाक़ी समझ खड़े होकर आएगी।
अपरिहार्य को स्वीकार करो; अपनी शक्ति उसके लिए बचाओ जिसे तुम बदल सकते हो।
दिन प्रशंसा में ढले या मौन में, प्रयास वही रहे।
लोभी मन फल बटोरता है; विवेकी मन प्रयास खुलकर लुटाता है।
जो आपके हिस्से का है कीजिए; कर्म निष्क्रियता से श्रेष्ठ है।
पूरे मन से काम करो, और परिणाम को अर्पित कर दो।
इच्छा से कोई मुक्त नहीं होता; मुक्ति कर्म से रची जाती है।
ज्ञान वह स्थान है जहाँ सारा प्रयास विश्राम पाता है।
अनुशासन के साथ चलो, लक्ष्य जल्दी आता है।
अपना कर्तव्य पूरे मन से करो, उसमें से किसी से चिपको मत।
हर कार्य मन को माँजने का अवसर है।
एक स्थान पर समेटा हुआ ध्यान शक्ति बन जाता है।
एक साथ सब ओर मत देखो; एक चीज़ को अच्छे से देखो।
दृढ़ बुद्धि, कोमल गति।
आने का अभ्यास करो; छोड़ने का अभ्यास करो।
सही साधन चुनो, फिर प्रक्रिया पर भरोसा रखो।
समझने तक पूछते रहो।
जिसे तुमने कभी चाहा था, उसकी ओर लौटो और उसे वापस आते देखो।
बीते कल की गति आज के लिए उपहार है।
प्रयास को उतना समय दो जितना उसे चाहिए।
भीतर की यात्रा कम लोग शुरू करते हैं; उससे भी कम पूरी करते हैं।
विवेक धीरे-धीरे पकता है, अनेक जन्मों के प्रयास में।
श्रद्धा उन हाथों को खोलती है जिन्हें प्रयास ने तैयार किया है।
श्रद्धा और अभ्यास एक जोड़ी हैं; कोई अकेला दूर नहीं जाता।
अनुशासन तब मधुर होता है जब उसका उद्देश्य योग्य हो।
विवेक के बिना की आशाएँ फलहीन प्रयास की ओर ले जाती हैं।
विनम्रता और प्रयास मिलकर भक्ति को मजबूत बनाते हैं।
अच्छी परिस्थितियाँ गहरे उतरने का निमंत्रण हैं, ढील का नहीं।
भक्ति मन को अकेले प्रयास से अधिक तीक्ष्ण करती है।
जो उभरकर दिखे उससे शुरू करो; बाकी पीछे आएगा।
स्थिर प्रेम चमकदार प्रयास से अधिक टिकता है।
स्थिर होने की प्रतीक्षा मत कीजिए; स्थिर होने तक अभ्यास कीजिए।
उद्देश्य साधारण प्रयास को पवित्र बना देता है।
जुनून अग्नि है: सँभाला जाए तो गर्म, अंतहीन खिलाया जाए तो हानिकर।
किसी बड़े में विश्वास तुम्हारे प्रयासों को टिकने की जगह देता है।
लालसा से चलने वाला कर्म जल्दी बुझ जाता है।
स्थिर संकल्प और शांत उत्साह सबसे अच्छे कर्मी को गढ़ते हैं।
किसी अच्छे कार्य को केवल इसलिए मत छोड़िए कि वह पूर्ण नहीं है।
साहस और जिज्ञासा साझेदार हैं।
अपने उचित कर्तव्य को अधूरा छोड़ना उसे निभाने के श्रम से अधिक महँगा पड़ता है।
यदि कोई पुरस्कार निश्चित न हो, तब भी क्या तुम इतने ही मन से काम करोगे?
अभाव से नहीं, पूर्णता से काम कीजिए।
श्रद्धा प्रयास करने की तत्परता है।
समय और प्रयास भी देने योग्य धन हैं।
अर्पण के अनेक मार्ग, एक ही जड़: कर्म।
ज्ञान चुपचाप आता है, काम पूरा होने के बाद।
साहस वह है जो अनकटे संशय के बावजूद उठ खड़ा हो।
अपने प्रयास और संयम सबके मित्र को अर्पित करो।
अपने तप को बोझ नहीं, अर्पण बनने दो।
निष्क्रियता त्याग नहीं है।
हवा रहित स्थान बनाए जाते हैं, मिलते नहीं।
दोहराव से योग सहज हो जाता है।
स्थिरता चाहना और उसके लिए संघर्ष करना परस्पर विरोधी नहीं।
बलवान मन को केवल ज़ोर से साधना कठिन है।
आत्म-संयम वाहन है; प्रयास ईंधन।
अनुशासन वह मार्ग है जिससे आशा पहुँच के भीतर आती है।
जो तुमने सद्भाव से बनाया है, वह तुम्हें आश्रय देगा।
जो तुमने अभ्यास किया है, वह तुम्हें तुम्हारी समझ से अधिक दूर ले जाता है।
उन थोड़े लोगों में रहो जो भीतर शुरू किया हुआ पूरा करते हैं।
अनुशासन की अपनी एक ज्योति होती है।
उसके लिए प्रयास करो जो शरीर से अधिक टिकता है।
ऐसी पूर्णता का लक्ष्य रखो जिसे दोहराना न पड़े।
कठिन होने के कारण कर्तव्य से बचने पर शांति नहीं मिलती।
सफलता शरीर, कर्ता, साधन, प्रयास और दैव से बनती है।
शांत कर्मी, लालसा-ग्रस्त कर्मी से आगे जाता है।
स्थिरता आरंभ करने से बनती है, भले ही आरंभ अधूरा हो।
स्वयं को अपने बीते हुए कल से नापिए।
समय सीमित है; आरंभ करो।
परिणामों के प्रति शांति तुम्हें अपना सब कुछ देने के लिए मुक्त करती है।
कर्म से पहले पूछो: मैं सौदा कर रहा हूँ या अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहा हूँ?
संशय के समय पूछिए: अभी मैं एक कौन-सी बात कर सकता हूँ?
कर्म के तथ्य को स्वीकारिए और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान दीजिए।
बिना चिपके कर्म कीजिए तो आप सहजता से कर्म करते हैं।
अनासक्ति कम ऊर्जा नहीं; स्पष्ट ऊर्जा है।
अपने दैनिक श्रम को स्वयं की कार्यशाला बना लो।
अपने जीवन में हल्के बैठो; वह तुम्हारे प्रयास से अधिक पर चलता है।
साधना पहले एकांत में बनती है, फिर सबके सामने दिखती है।
अच्छी आदतें अच्छी तैयारी से शुरू होती हैं।
मोह-रहित लोग पूरा स्वयं देते हैं, केवल बचा हुआ समय नहीं।
जो आपके हिस्से का कार्य है उसे कीजिए, चाहे वह साधारण हो।
जब अहं चलाता है, तब प्रयास तनाव बन जाता है।
संकल्प वह निर्णय है जिसे आप निभाते हैं, वह भाव नहीं जिसे आप अनुभव करते हैं।
लोभ परिश्रम को हानि में बदल देता है।
टालमटोल स्वयं का धीमा क्षरण है।
छोटे कर्म जड़ता की औषधि हैं।
अभ्यास संकल्प का दैनिक प्रमाण है।
कुछ आनंद अभ्यास से अर्जित होता है और दुःख का अंत करता है।
कठिन चीज़ों से भागिए मत; उनमें बढ़िए।
प्रेम से किया गया कर्तव्य एक शांत प्रकार की निपुणता बन जाता है।
प्रयास अर्पित कीजिए, श्रेय छोड़िए, और पूर्णता आ जाएगी।
समर्पण प्रयास का अंत नहीं; भय का अंत है।
प्रतिद्वंद्वी का कौशल इसका दर्पण है कि आप अभी क्या सीख सकते हैं।
आपके उपहार का एक नाम है; उसका उपयोग कीजिए।
जो काम तुम्हारा है, उसे टालना बंद करो।
उस क्षण को हाँ कहो जो तुमसे तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ माँगता है।
टाला हुआ कर्तव्य निभाए हुए कर्तव्य से भारी पड़ता है।
सुख-दुःख, जीत-हार: इनमें से कोई भी तुम्हारा प्रयास तय न करे।
काम ऐसे करो मानो परिणाम पहले ही स्वीकार हो चुका हो।
केवल फल के लिए किया गया साधन तुम्हें दौड़ाता ही रहता है।
भीतर और बाहर, दोनों का साथ का अनुशासन ही श्रेष्ठ है।
श्रेष्ठ होना भीतर की शांति को बाहर के प्रयास से जोड़ना है।
अगले छोटे कर्तव्य से आरंभ कीजिए।
विवेक खुले हाथों वाला उत्साह है।
अपने स्वभाव को समझिए, फिर उसके साथ काम कीजिए, उसके विरुद्ध नहीं।
सिर हिलाकर मत चलो; तब तक पूछो जब तक बात समझ न आए।
मुक्ति उन कर्मशीलों को मिली जिन्होंने छोड़ना सीखा।
अपने अनुशासन को आराम से परे किसी उद्देश्य की सेवा में लगाओ।
तुम्हारी साधना का रूप जो भी हो, वह करने से शुरू होती है।
सीखते रहो, तो तुम्हारा श्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
साधना ही त्याग को संभव बनाती है।
अनुशासन और समझ मिलकर शांति को पहुँच में ला देते हैं।
कर्म के लिए कर्म करो, तुम पहले ही त्यागी हो।
इच्छुक लोगों के लिए भी स्थिरता कठिन होती है।
आज फिर वह छोटा अभ्यास करो।
इस विचार में विश्राम करो कि सच्चा काम पुरस्कृत होता है।
निम्न स्वयं से जीवंत स्वयं तक उठो।
सच्चा विश्राम केवल पुण्य से नहीं खरीदा जा सकता।
इस वृक्ष को कोई पूरा नहीं देखता; जो पहुँच में है, उसे ढीला करके आरंभ कीजिए।
धैर्य उसे चमकाता है जिसे जल्दबाज़ी केवल खरोंचती है।
विकास प्रयास से पहले उपहार है।
साधन, कार्य और कर्ता: एक ही तिपाई के तीन पाँव।
निराश मन हर कार्य को बहुत भारी देखता है।
अंधेरे में लंबी प्रतीक्षा से बेहतर है उजाले की ओर एक छोटा कदम।
निपुणता प्रतिभा से कम, निष्ठा की ऋणी होती है।
अपना स्थान जानिए और उसे भली-भाँति निभाइए।
जो एक घंटे में नष्ट हो जाए, उसे लौटाने में जीवन लग सकता है।
बीच के समय को एक साथ हल्के और पूरे मन से थामो।
यहाँ की प्रगति कभी उलटती नहीं; वह केवल गहरी होती है।
बिखरा प्रयास थकाता है; एकाग्र प्रयास शांत करता है।
अनासक्त कर्म सबसे कुशल प्रकार का कर्म है।
प्रेरणा की प्रतीक्षा मत कीजिए; अगला सही कार्य कीजिए।
हल्के से थामा गया कर्तव्य आपको ऊपर उठाता है।
स्वतंत्रता से किया गया कर्म सर्वोत्तम कर्म है।
‘मेरा’ और चिंतातुर आशा को छोड़िए; प्रयास रखिए।
हर मार्ग, यदि निष्ठा से चला जाए, अपना फल बाँटता है।
शरीर, मन और बुद्धि को आसक्ति के बिना काम में लगाओ।
काम से कमाए बिना ठहराव की जल्दी मत करो।
शांत हृदय आराम से नहीं खरीदा जाता।
शुद्धता धैर्य से बैठने का फल है।
संतुष्ट होने का अर्थ निष्क्रिय होना नहीं; अभाव की हड़बड़ी से मुक्त होना है।
सच्चे प्रयास को स्वच्छ दर्पण चाहिए।
तप दंड नहीं; निखार है।
कर्तव्य के कठिन भाग में अक्सर उसकी सीख छिपी होती है।
बल उसमें है कि कर्तव्य पसीना माँगे तब भी साथ रहा जाए।
धीमे होइए; शांति के बिना महत्वाकांक्षा शोर है।
जिसे नापा नहीं, उसे आरंभ मत कीजिए।
अहं-रहित उत्साह के साथ काम करना आनंद है।
अपना ईमानदार कार्य पूरे हृदय से कीजिए।
जो आपके हिस्से का कार्य है, उसमें डूब जाइए।
अपूर्णता सारे कार्य का मौसम है।
पूर्णतावाद टालमटोल का विनम्र रूप है।
उपदेश नक्शा है; चलना यात्रा।
सामूहिक प्रयास का अपना संगीत होता है।
उस पकड़ को छोड़ दीजिए जिसे थकान पहले ही ढीला कर चुकी है।
यदि तुम इसमें अपना पूरा स्वयं दे दो, तो कौन-सा परिणाम तुम स्वीकार कर पाओगे?
विनम्रता के बिना प्रयास पहली तेज़ लहर में बह जाता है।
कर्म अंतहीन विचार-विमर्श से श्रेष्ठ है।
अपने प्रयास को पूरे की सेवा करने दीजिए।
भीतर की पूर्णता बेचैन होड़ का अंत है।
उपेक्षा दूसरों के लिए उलझन पैदा करती है।
वही प्रयास स्वार्थी या निःस्वार्थ हो सकता है; चुनिए।
अपना काम भली-भाँति करते हुए दूसरों को कोमलता से प्रोत्साहित कीजिए।
अपने ही अधूरे मसौदे के लेखक बनिए।
अपना आरंभ-बिंदु अपनाइए, जैसा भी अपूर्ण हो।
बाहर जाकर प्रतीक्षा करने से अच्छा है कि मैदान में रहकर बढ़ो।
अपने हाथ से उठो और दूसरों के लिए मदद करना सरल हो जाएगा।
पूर्ण प्रयास के बिना श्रद्धा भी एक उचित प्रश्न उठाती है: क्या वह व्यर्थ गई?
एक सच्चा साधक अनेक सामान्य लोगों के बराबर है।
कठिन मार्ग गलत नहीं होता, पर उस पर चलने से पहले उसकी कीमत जान लीजिए।
मार्ग स्पष्टता में समाप्त होता है, और स्पष्टता इच्छा से शुरू होती है।
यह भी देखिए कि कर्म कैसे सिद्ध होते हैं, केवल यह नहीं कि क्या सिद्ध हुआ।
साधन को धार दीजिए, कार्य को स्पष्ट कीजिए, कर्ता को स्थिर कीजिए।
इच्छा प्रयास को ईंधन देती है, पर उसे चिंता से भी भर देती है।
विनम्र कर्मी जो शुरू करते हैं, उसे पूरा करते हैं।
निठल्लापन विश्राम का वादा करता है और बेचैनी देता है।
स्वभाव प्रतिभा देता है; अनुशासन उसे दिशा।
सामने के कार्य में आनंद खोजिए।
अपने कर्तव्य से इतना प्रेम कीजिए कि उसमें सुधरते रहें।
पूर्णता श्रद्धा से काम करने वालों के पास चुपचाप आती है।
धुआँ होने का अर्थ यह नहीं कि अग्नि गलत है।
सर्वोच्च अवस्था का मार्ग अपने कर्तव्य को भली-भाँति करने से शुरू होता है।
तैयारी समझदारी है; अंतहीन सूची-बनाना नहीं।
अपनी तैयारी पर भरोसा कीजिए, अपनी गणना पर नहीं।
उपस्थित रहिए, भले आपकी भूमिका सबसे ऊँची आवाज़ वाली न हो।
ध्यान से देखा गया कार्य बेहतर समझा जाता है।
संस्कृति को बनाए रखना दैनिक कर्म है।
जो सत्य है उसे बचाव की आवश्यकता नहीं; जो असत्य है उसे निरंतर प्रयास चाहिए।
यदि लाभ और हानि तुम्हारे लिए समान भार रखें, तो तुम्हारे प्रयास में क्या बदलता है?
सर्वोत्तम अनुशासन सहज अच्छे काम जैसा दिखता है।
निभाया गया कर्तव्य टाले गए कर्तव्य से हल्का होता है।
उपस्थित होकर नेतृत्व कीजिए।
थका नेता भी सिखाता है, इसलिए समझदारी से विश्राम कीजिए और लौटिए।
नक्शे से बहस करना बंद कीजिए और पहला कदम बढ़ाइए।
चुपचाप अभ्यास कीजिए और परिणामों को बोलने दीजिए।
सतह साफ़ कीजिए और सत्य चमक उठता है।
अभ्यास रुकते ही विस्मृति शुरू हो जाती है।
जब ज्ञान आत्म-संयम को राह दिखाए, प्रयास भी स्वतंत्रता लगता है।
आज के काम ने तुम्हें क्या सिखाया?
प्रकृति की लय तुम्हें तुम्हारे धक्के से अधिक दूर ले जाती है।
जिसे तुम बदलना सीख सकते हो, उसका दोष आकाश को मत दो।
थकान आपके उद्देश्य को जाँचने का संकेत है।
दुःख प्रयास से बचने से नहीं, सही प्रयास खोजने से समाप्त होता है।
कुछ भी करने की कीमत को स्वीकार कीजिए।
ज्ञान सुकृत कर्म का फल है।
अपना सर्वोत्तम रथ सबसे अधिक स्पष्टता के स्थान तक ले जाइए।
विरासत में मिले मूल्य, दोबारा गढ़े गए मूल्यों से हल्के होते हैं।
निष्क्रियता काम से भारी होती है।
अनासक्ति को कम करने का बहाना मत बनने दीजिए।
जिसे कोई नया नहीं करता, उसे समय घिस देता है।
विश्राम के भी उचित और अनुचित रूप होते हैं।
विचारशील साधक बेचैन खोजी से जल्दी पहुँचता है।
आज तुम कौन-सा पुराना कौशल या अभ्यास जगा सकते हो?
बेचैन होड़ शायद ही विश्राम तक पहुँचती है।
द्वेष दिशाहीन हुआ प्रयास है।
आज तुम कौन-सी छोटी साधना दोहराओगे?
आज कौन-सा छोटा कदम तुम्हारे हृदय को राहत दे सकता है?
तुम अपने भीतर किस बीज की देखभाल कर रहे हो?
तुम अपने भीतर के किस बीज को बढ़ने में मदद कर रहे हो?
गहरे मार्ग पर हड़बड़ी मत करो।
यदि तुम प्रयास छोड़ दो तो तुम्हें सबसे अधिक क्या खोने का डर है?
आज तुम क्या पूछने का साहस करोगे?
हर सच्ची साधना कुछ ऊपर अर्पित करती है।
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